गणेशीलाल व्यास ‘उस्ताद’ (1907–1965) जोधपुर के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार थे। वे राजस्थानी और हिंदी साहित्य से जुड़े हुए थे तथा अपनी काव्य-रचनाओं के लिए प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं में राजस्थान की संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक चेतना के विविध स्वर दिखाई देते हैं। राजस्थानी साहित्य के आधुनिक दौर के कवियों में उनका उल्लेख किया जाता है।
- अरे बुझागड़!
- आ जन कवि री जुग वांणी
- आजादी री जीत कठै है
- बंदा मैणत री जै बोल
- दीवट
- घरे आजा
- इण जुग रा इकबार
- जन जन रै मन हेत चाहीजै
- करमां री लकीरां नै
- लाल धजा री आंण फिरै
- मत जा साथी
- म्हे आया अकल बतावा नै
- पिण आगै आगै हालौ
- राज बदळग्यौ म्हांनै कांई
- उस्तादां री आंण