मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता
मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता
पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता
मुझे ऐ नाख़ुदा आख़िर किसी को मुँह दिखाना है
बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता
मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा
मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता
दिल-ए-बे-हौसला है इक ज़रा सी ठेस का मेहमाँ
वो आँसू क्या पिएगा जिस को ग़म खाना नहीं आता
सरापा राज़ हूँ मैं क्या बताऊँ कौन हूँ क्या हूँ
समझता हूँ मगर दुनिया को समझाना नहीं आता
यगाना चंगेज़ी के बारे में
यगाना चंगेज़ी की शायरी अपनी साफ़गोई के लिए जानी जाती है। वे बात को घुमा कर नहीं कहते, सीधे कहते हैं, और इसीलिए उनके शेर पढ़ते ही ज़ेहन में बैठ जाते हैं।
यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।
यगाना चंगेज़ी की सभी ग़ज़लें
- मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता
- ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया
- क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई
- अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या
- सब तिरे सिवा काफ़िर आख़िर इस का मतलब क्या
- ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है
- ज़माने पर न सही दिल पे इख़्तियार रहे
- दिल लगाने की जगह आलम-ए-ईजाद नहीं
- सलामत रहें दिल में घर करने वाले
- कारगाह-ए-दुनिया की नेस्ती भी हस्ती है
- चले चलो जहाँ ले जाए वलवला दिल का
- सिलसिला छिड़ गया जब 'यास' के अफ़्साने का
- हनूज़ ज़िंदगी-ए-तल्ख़ का मज़ा न मिला
- जब हुस्न-ए-बे-मिसाल पर इतना ग़ुरूर था
- मौत आई आने दीजिए पर्वा न कीजिए
- आप में क्यूँकर रहे कोई ये सामाँ देख कर
- बैठा हूँ पाँव तोड़ के तदबीर देखना
- चराग़-ए-ज़ीस्त बुझा दिल से इक धुआँ निकला
यगाना चंगेज़ी को पढ़ते हुए एक बात साफ़ महसूस होती है कि वे बात को लंबा खींचते नहीं। जहाँ कई शायर एक ही ख़याल को तीन-चार शेरों में कहते हैं, वे एक शेर में कह कर आगे बढ़ जाते हैं। इसीलिए उनकी ग़ज़ल पहली बार में समझ आ जाती है, और दूसरी बार पढ़ने पर उसमें नई बात मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यगाना चंगेज़ी की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?
सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।
यगाना चंगेज़ी की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?
सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।
ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?
शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।
यगाना चंगेज़ी की शायरी की ख़ास बात क्या है?
उनकी भाषा में दिखावा नहीं है। वे जो कहते हैं सीधे कहते हैं, और यही सीधापन उनके शेरों को याद रखने लायक बनाता है।