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सागर सिद्दीक़ी की ग़ज़लें: Sagar Siddiqui Ghazal in Hindi

2026-11-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
मैं ने पलकों से दर-ए-यार पे दस्तक दी है
मैं वो साइल हूँ जिसे कोई सदा याद नहीं
मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहू
हम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं
कैसे भर आईं सर-ए-शाम किसी की आँखें
कैसे थर्राई चराग़ों की ज़िया याद नहीं
सिर्फ़ धुँदलाए सितारों की चमक देखी है
कब हुआ कौन हुआ किस से ख़फ़ा याद नहीं
ज़िंदगी जब्र-ए-मुसलसल की तरह काटी है
जाने किस जुर्म की पाई है सज़ा याद नहीं
आओ इक सज्दा करें आलम-ए-मदहोशी में
लोग कहते हैं कि 'साग़र' को ख़ुदा याद नहीं

सागर सिद्दीक़ी के बारे में

सागर सिद्दीक़ी की ग़ज़ल में भाषा का एक अपना बहाव है। उनके शेर आसान शब्दों में गहरी बात कह जाते हैं।

यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।

सागर सिद्दीक़ी की सभी ग़ज़लें

ग़ज़ल पढ़ने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले पूरी ग़ज़ल एक बार पढ़ें, और फिर जो शेर सबसे ज़्यादा छू गया उसे दोबारा पढ़ें। ग़ज़ल ऐसी विधा है जहाँ हर शेर अपने आप में पूरा होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सागर सिद्दीक़ी की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?

सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।

सागर सिद्दीक़ी की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?

सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।

ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?

शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।

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