🎶 पँवारी (पवारी) लोकगीत: सम्पूर्ण लिरिक्स संग्रह
पांढरी माता की वंदना से लेकर सगाई, खेल, पहेलियों और पारंपरिक आयोजनों के गीतों का अनमोल खजाना।
- पांढरी की ओ माता-माय
- भैय्या घरअ् भयो नंदलाल
- झूलना मऽ झूलय बारा रे
- जूजू…मराअ् बारा की गाई…गाई
- कोयला बाई बोले
- बेटी देस हिण्डयो परदेस
- सगाई गीत
- आरू जोतन लग्या गज मोंगर ओ
- आरू बाराच डेहरी को माण्डोड़ो ओ
- कोन बड़े की नान्दन बेटी, सवा घड़ी दूध नाव्हय वो
- गाँव पाटिल को का हो रे नाम (नाव)
- गाँव पाटिल को ज्ञानराव नाव
- का माँगय पाटिल का माँगय ओ
- राछोड़ो, राछोड़ो
- छीता पऽ सासरवास मत करय ओ माय
- कारी ओ खुखड़ी
- पाँच बोट की चिमटी नऽ
- दरना दरू बाई, गाऊ मऽ माता-पिता
- कारी ओ खुकड़ी (अन्य संस्करण)
- धीरू चलो ओ मीठी बाई
- घर को सराओ सारवन्न
- एनी अस्तोरी का है वो पाई
- पायऽ मऽ हय ओ पायजन
- एना फागुन का महीना मऽ
- मखऽ मरन देजो
- मऽरीऽ माय हय ओ हीरा
- मऽरोऽ जवाई पाटिल
- दरना दरूऽ बाई
- क्रिया-कलाप के गीत / भाग – 1
- क्रिया-कलाप के गीत / भाग – 2
- लौंदड़ बड़ी हटेलू
- पीहू पुकारै पीहू पुकारै
- कोन राय को बिछुआ
- कोनऽ सहेर को गारोड़ी
- गढ़ा सी आई गढ़ पाव्हनीन
- दूर-दूर सी आयो रे लाड़ा धूरऽ -भर्या पाय रे
- हमरा भैय्या आँगन रे शोभा बढ़ै बिसन देव
- मुन्ना झोटिंगड़ल्या
- राधा तोरा घरऽ आया मिजवान
- कौड़ीवाला कौड़ी वाला
- तुम चल्या समदी तुम चल्या
- समदी चल्या रिसियाय हम सी राम-राम लेअ् लो
- वा ते समदिन कव्हय, मऽ मायका जाऊ
- हरी (हिरवी) हरी चोच को, हरो हरो मुरगा
- नान्हाज् बड़ा साजनबठ्या, बठ्या बड़ा हताई रे
- ऊँ ते समदी आयो देड़ दमड़ी को
- आवा लिखु आवरी
- कोन राय बोवय जोंधरी, मऽरोऽ साँवरिया ओ
- एनी हबेली मऽ दुहिरा-दुहिरा खम्ब ते
- कहाँ से आयो लखेरा रे, जमुदरिया के बाबा
- दायजा, बायजा, भुरसो-फट्ट, हिरवो कच्च
- एक-एक घुँघरू ओना चन्दू का पाय मऽ
- कोनऽ तोखऽ मार्यो खड़का
- ओना मुन्ना का घर मऽ घुम्मर गाय
- कारा खेत मऽ समदन खऽ पटको
- छोटो मोटो मेहन्दी को झाड़
- यू चम्फा घाट घटेलो रे
- बुला तोरी बहिन खऽ ते धोहे तोरा पाय रे
- कहाँ सी मंगत ऊबज्यो रे भाई
- धरतीज फोड़ी ओनऽ चूल्हा डाल्यो रे भाई
- नकसुल्या चाऊर की खीर बनाई रे भाई
- गाँव-गाँव का नाई बुलाओ रे भाई
- न्याहो धोयो मंगत थाड़ो भयो रे भाई
- मऽरोऽ मंगत मऽरोऽ मंगत काहे करय माय
- मायज रोहे ओकी जलम जुग रे भाई
- बता वीरन को देश बनदेवा
- मखज का पूछय मऽरीऽ बैन्दोली
- बता मऽरा बीरनऽ को द्वार रे बनदेवा
- नसानी दीन्ही कोद्य बन देवा
- आँगन मऽ फेकू कोदय बनदेवा
- फाटी सी दीन्ही गोदड़ी रे बनदेवा
- घूड़ा परऽ फेंकू गोदड़ी रे बनदेवा
- मरघट की होऊँ डाकिन रे बनदेवा
- पहेलियाँ / भाग – 1
- पहेलियाँ / भाग – 2
- खेल गीत / भाग – 1
- खेल गीत / भाग – 2
- आनी समधन को धर बताओ रे भाई
- बड़ पीपर पऽ बाँध्यो रे हिण्डोरना
- विवाह पूर्व बेटी का वर विचार
- एना घरऽ की घट्टी बी बुरी माय
- पेरो-पेरो सीता ओ श्रीराम
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