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उबैदुल्लाह अलीम की ग़ज़लें: Obaidullah Aleem Ghazal in Hindi

2026-11-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए

अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी
कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा
कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए
ज़हे वो दिल जो तमन्ना-ए-ताज़ा-तर में रहे
ख़ोशा वो उम्र जो ख़्वाबों ही में बहल जाए
मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ
जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए
हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत
जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए

उबैदुल्लाह अलीम के बारे में

उबैदुल्लाह अलीम की शायरी में तन्हाई और ख़ुद से सवाल करने का सुर है। उनके शेर सुनने में आसान लगते हैं, पर बाद में देर तक चलते रहते हैं।

यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।

उबैदुल्लाह अलीम की सभी ग़ज़लें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उबैदुल्लाह अलीम की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?

सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।

उबैदुल्लाह अलीम की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?

सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।

ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?

शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।

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