अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी
कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा
कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए
ज़हे वो दिल जो तमन्ना-ए-ताज़ा-तर में रहे
ख़ोशा वो उम्र जो ख़्वाबों ही में बहल जाए
मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ
जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए
हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत
जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए
उबैदुल्लाह अलीम के बारे में
उबैदुल्लाह अलीम की शायरी में तन्हाई और ख़ुद से सवाल करने का सुर है। उनके शेर सुनने में आसान लगते हैं, पर बाद में देर तक चलते रहते हैं।
यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।
उबैदुल्लाह अलीम की सभी ग़ज़लें
- Obaidullah Aleem Ghazal
- अजीब थी वो अजब तरह चाहता था मैं उबैदुल्लाह अलीम
- अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए उबैदुल्लाह अलीम
- अज़ाब आए थे ऐसे कि फिर न घर से गए उबैदुल्लाह अलीम
- आओ तुम ही करो मसीहाई उबैदुल्लाह अलीम
- ऐसी तेज़ हवा और ऐसी रात नहीं देखी उबैदुल्लाह अलीम
- कुछ इश्क़ था कुछ मजबूरी थी सो मैं ने जीवन वार दिया उबैदुल्लाह अलीम
- कुछ दिन तो बसो मिरी आँखों में उबैदुल्लाह अलीम
- कोई धुन हो मैं तिरे गीत ही गाए जाऊँ उबैदुल्लाह अलीम
- ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूँ उबैदुल्लाह अलीम
- ज़मीन जब भी हुई कर्बला हमारे लिए उबैदुल्लाह अलीम
- जवानी क्या हुई इक रात की कहानी हुई उबैदुल्लाह अलीम
- जो उस ने किया उसे सिला दे उबैदुल्लाह अलीम
- तू अपनी आवाज़ में गुम है मैं अपनी आवाज़ में चुप उबैदुल्लाह अलीम
- तेरे प्यार में रुस्वा हो कर जाएँ कहाँ दीवाने लोग उबैदुल्लाह अलीम
- दिल ही थे हम दुखे हुए तुम ने दुखा लिया तो क्या उबैदुल्लाह अलीम
- दुखे हुए हैं हमें और अब दुखाओ मत उबैदुल्लाह अलीम
- नींद आँखों से उड़ी फूल से ख़ुश्बू की तरह उबैदुल्लाह अलीम
- बना गुलाब तो काँटे चुभा गया इक शख़्स उबैदुल्लाह अलीम
- बाहर का धन आता जाता असल ख़ज़ाना घर में है उबैदुल्लाह अलीम
- मिट्टी था मैं ख़मीर तिरे नाज़ से उठा उबैदुल्लाह अलीम
- मैं जिस में खो गया हूँ मिरा ख़्वाब ही तो है उबैदुल्लाह अलीम
- ये और बात कि इस अहद की नज़र में हूँ उबैदुल्लाह अलीम
- वहशत उसी से फिर भी वही यार देखना उबैदुल्लाह अलीम
- वहशतें कैसी हैं ख़्वाबों से उलझता क्या है उबैदुल्लाह अलीम
- वीरान सराए का दिया है उबैदुल्लाह अलीम
- वो रात बे-पनाह थी और मैं ग़रीब था उबैदुल्लाह अलीम
- सुख़न में सहल नहीं जाँ निकाल कर रखना उबैदुल्लाह अलीम
- हँसो तो रंग हूँ चेहरे का रोओ तो चश्म-ए-नम में हूँ उबैदुल्लाह अलीम
- हर आवाज़ ज़मिस्तानी है हर जज़्बा ज़िंदानी है उबैदुल्लाह अलीम
- हिज्र करते या कोई वस्ल गुज़ारा करते उबैदुल्लाह अलीम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उबैदुल्लाह अलीम की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?
सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।
उबैदुल्लाह अलीम की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?
सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।
ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?
शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।