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Sant Judiram Ji Bhajan Lyrics : संत जूड़ीराम के भजन

2025-08-10 · भजन / Bhajan

संत जूड़ीराम भक्ति परंपरा के उन महान संतों में से हैं जिनके भजनों में राम नाम की महिमा, सतगुरु की कृपा और आत्मज्ञान की गहरी झलक मिलती है। उनके पद और भजन आज भी साधकों के दिलों को छूते हैं। यहाँ संत जूड़ीराम के भजनों का विशाल संग्रह प्रस्तुत है।

✍️ नाम संत जूड़ीराम (Sant Joodiram) – भक्ति परंपरा के महान संत, राम भक्त, पद रचनाकार
जन्म स्थान एवं तिथि अज्ञात (मान्यता अनुसार: उत्तर भारत, 18वीं-19वीं शताब्दी)
🏆 सम्मान / प्रभाव भक्ति आंदोलन के अनुयायियों में अत्यधिक सम्मानित, पद लोक संगीत और कीर्तनों में प्रचलित
🎯 विशेष उपलब्धि सैकड़ों भजन, पद और राम नाम आधारित रचनाएँ; "राम रस" और "शबद" पर गहन लेखन
💡 मुख्य विषय राम नाम, सतगुरु महिमा, शबद, मन की चंचलता और संसार की नश्वरता; सधुक्कड़ी भाषा में रचना
📖 प्रमुख पद जागो नहीं जाग जल भारी, हर बिन जनम गमायो, राम रस पीवत
🕊️ समाधि उत्तर भारत (परंपरा अनुसार)

संत जूड़ीराम के प्रसिद्ध भजन संग्रह

संत जूड़ीराम: राम नाम और निर्गुण भक्ति परंपरा

संत जूड़ीराम भक्ति परंपरा के उन संतों में आते हैं जिन्होंने सधुक्कड़ी, अवधी और ब्रज के सुंदर समन्वय से जन-जन तक आत्मज्ञान और राम नाम का संदेश पहुँचाया। उनके भजनों में सतगुरु के शबद की साधना, मन की चंचलता पर नियंत्रण और संसार की नश्वरता का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

संत जूड़ीराम का सबसे प्रसिद्ध भजन कौन सा है?

संत जूड़ीराम के सबसे प्रसिद्ध भजनों में "जागो नहीं जाग जल भारी", "हर बिन जनम गमायो", "राम रस पीवत ही मर जैहै" और "सुरत समार शबद घर खेलो" शामिल हैं।

संत जूड़ीराम ने पद किस भाषा में रचे हैं?

उनकी रचनाएँ मुख्य रूप से सधुक्कड़ी भाषा में हैं, जिसमें अवधी, ब्रज और राजस्थानी शब्दावली का सहज प्रभाव देखने को मिलता है।

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