जैन धर्म में आरती भक्ति का महत्वपूर्ण अंग है। यहाँ जैन तीर्थंकरों और देवियों से जुड़ी 26 पावन जैन आरतियाँ एक ही जगह संकलित हैं — पंच परमेष्ठी, चौबीसी, आदिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी आरती सहित। जिस आरती के बोल चाहिए, उसके नाम पर क्लिक करके पूरी आरती हिंदी में पढ़ें।
जैन आरती संग्रह (Jain Aarti Lyrics in Hindi)
- आरती पंच परमेष्ठी – Panch Parmeshthi Aarti
- आरती चन्द्रप्रभु जी भगवान (तिजारा) – Chandraprabhu Aarti
- आरती पारसनाथ स्वामी – Aarti Shri Parshvanath Ji
- अजित प्रभु आरती – Ajitnath Ji Aarti
- आदिनाथ स्वामी आरती – Adinath Swami Aarti
- आरती कुंथुनाथ जी – Kunthunath Ji Aarti
- आरती मल्लिनाथ जी – Mallinath Ji Aarti
- श्री मुनिसुव्रतनाथ जी आरती (दो रूप) – Munisuvratnath Aarti
- आरती-नेमिनाथ जी – Neminath Ji Aarti
- आरती पद्मप्रभु जी – Padmaprabhu Ji Aarti
- आरती पुष्पदंता – Pushpadant Swami Aarti
- आरती बाहुबली जी – Bahubali Ji Aarti (Gommateshwar)
- आरती अनंथ्नाथ जी – Anantnath Ji Aarti
- श्री जिनवाणी माता की आरती – Jinvani Mata Aarti
- आरती बजे छम छम छम – Aarti Baje Cham Cham
- आरती शांतिनाथ (रूप 1) – Shantinath Aarti
- चौबीसी आरती – Choubisi Aarti (All 24 Tirthankaras)
- आरती शीतलनाथ जी – Sheetalnath Ji Aarti
- आरती श्रेयांशनाथ – Shreyansanath Ji Aarti
- आरती विमलनाथ जी – Vimalnath Ji Aarti
- आरती वासुपूज्य – Vasupujya Ji Aarti
- शांतिनाथ भगवान आरती (रूप 2) – Shantinath Aarti
- पारस देवा आरती (बड़ागांव) – Baragaon Parshvanath Aarti
- श्री नन्दीश्वर द्विप आरती – Nandishwar Dweep Aarti
- आरती जय चंद्रप्रभु देवा – Chandraprabhu Aarti (Tijara)
- श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह – Mahavir Swami Aarti (4 Versions)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जैन आरती क्या है?
जैन धर्म में आरती भगवान की स्तुति और भक्ति का एक रूप है, जिसमें दीपक जलाकर तीर्थंकरों की वंदना की जाती है।
जैन धर्म की सबसे प्रसिद्ध आरती कौन-सी है?
पंच परमेष्ठी आरती, चौबीसी आरती और महावीर स्वामी आरती जैन धर्म की सबसे प्रसिद्ध आरतियों में शामिल हैं।
पंच परमेष्ठी आरती किसे कहते हैं?
पंच परमेष्ठी आरती पाँच परमेष्ठियों — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु — की वंदना में गाई जाती है।
चौबीसी आरती क्या है?
चौबीसी आरती जैन धर्म के चौबीस तीर्थंकरों की संयुक्त वंदना है।
जैन आरती कब की जाती है?
जैन मंदिरों में आरती प्रतिदिन की जाती है, विशेषकर प्रातः और संध्या के समय।