हिंदी साहित्य की असली गहराई सिर्फ कहानियों या कविताओं में नहीं, बल्कि उसके निबंधों में भी बसती है। एक अच्छा निबंध सिर्फ जानकारी नहीं देता — वह सोचने पर मजबूर करता है, समाज का आईना दिखाता है, और कभी-कभी परसाई जी की तरह गुदगुदाते हुए गहरी चोट कर जाता है।
इस संग्रह में हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंध संकलित हैं — आचार्य रामचंद्र शुक्ल की वैचारिक गहराई से लेकर हजारीप्रसाद द्विवेदी की सांस्कृतिक छाँव, महादेवी वर्मा की संवेदनशीलता और हरिशंकर परसाई के व्यंग्य तक। नीचे निबंधकार के अनुसार निबंध दिए हैं; अपनी पसंद का विषय चुनिए और शब्दों की दुनिया में डूब जाइए।
हिंदी निबंधों की सूची : Nibandh Suchi
महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबंध
- दंडदेव का आत्मनिवेदन
- संगीत के स्वर
- कालिदास के 'मेघदूत' का रहस्य
- भारतवर्ष में नशेबाज़ी
- समाचार-पत्रों का विराट् रूप
- क्या हिंदी नाम की कोई भाषा ही नहीं?
- देशी भाषाओं में शिक्षा
- संपादकों के लिए स्कूल
- लेखकों से प्रार्थना
- भारतीय चित्रकला
- सेठ खेमराज श्रीकृष्णदास
- कवि और कविता
- भारत की चित्र-विद्या
- स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
- लोभ
- क्रोध
- कवियों की उर्मिला-विषयक उदासीनता
- अलौकिक शिशु-गायक मास्टर मदन
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध
- काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था
- श्रद्धा-भक्ति
- रसात्मक-बोध के विविध रूप
- भय
- साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद
- लज्जा और ग्लानि
- लोभ और प्रीति
- घृणा
- करुणा
- क्रोध
- भाव या मनोविकार
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
- तुलसी का भक्ति-मार्ग
- ईर्ष्या
- 'मानस' की धर्म भूमि
- उत्साह
- कविता क्या है?
बालमुकुंद गुप्त के निबंध
- श्रीमान का स्वागत (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- बनाम लोर्ड कर्ज़न (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- हँसी ख़ुशी
- लार्ड मिंटो का स्वागत (शिवशंभु के चिट्ठे)
- वायसराय का कर्तव्य (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- उलटी दलील
- अपने तौर पर
- आशा का अंत (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- आशीर्वाद (शिवशंभु के चिट्ठे)
- पीछे मत फेंकिए (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- एक दुराश (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- बंग-विच्छेद (शिवशंभू के चिट्ठे और ख़त)
- मार्ली साहब के नाम (शिवशंभु के चिट्ठे)
- परोक्तं नैव मन्यते
- विदाई-संभाषण
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध
- हिंदी कविता की गति
- हिंदी-साहित्य और मुसलमान कवि
- भारतीय कथा−साहित्य का विकास
- कला
- मैं क्या पढूँ?
- मेघदूत में कालिदास का आत्मचरित
- सरस्वती के 60 वर्ष
- क्यों लिखूँ?
- प्रेम और विवाह की समस्या
- क्या लिखूँ?
- संगीत का महत्त्व
- भक्त-कवि
- हिंदी का नाट्य साहित्य और उसकी गति
हजारीप्रसाद द्विवेदी के निबंध
- आम फिर बौरा गए
- भारतीय संस्कृति की देन
- हमारे पुराने साहित्य के इतिहास की सामग्री
- ठाकुर जी की बटोर
- मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है
- प्राचीन भारत में मदनोत्सव
- नाख़ून क्यों बढ़ते हैं?
- पंडितों की पंचायत
- क्या निराश हुआ जाए
- शिरीष के फूल
- कुटज
जवाहरलाल नेहरू के निबंध
- अहमदनगर का क़िला
- दो पृष्ठभूमियाँ—भारतीय और अँग्रेज़ी
- नई समस्याएँ
- तलाश
- अंतिम दौर—दो
- भारत माता
- अंतिम दौर—एक
- तनाव
- सिंधु घाटी सभ्यता
- युगों का दौर
जयशंकर प्रसाद के निबंध
- नाटकों में रस का प्रयोग
- रस
- रहस्यवाद
- यथार्थवाद और छायावाद
- रंगमंच
- नाटकों का प्रारंभ
- कविता रसास्वाद
- कवि और कविता
बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' के निबंध
- बनारस का बुढ़वामंगल
- रंग की पिचकारी
- भारत वर्ष की दरिद्रता
- भारतेंदु अवसान
- हिंद, हिंदु और हिंदी
- समाचार पत्र या अख़बार किसे कहते हैं
- हमारी प्यारी हिंदी
इलाचंद्र जोशी के निबंध
- जन्मदिन
- आज का साहित्य
- भिन्नरूचिहिं लोक
- भावी साहित्य और संस्कृति
- साहित्य में वैयक्तिक कुंठा
- कला और नीति
सरदार पूर्ण सिंह के निबंध
- अमेरिका का मस्त जोगी वाल्ट हिटमैन—(Walt Whitman)
- सच्ची वीरता
- आचरण की सभ्यता
- कन्यादान
- पवित्रता
- मज़दूरी और प्रेम
देवेंद्र सत्यार्थी के निबंध
बालकृष्ण भट्ट के निबंध
सुमित्रानंदन पंत के निबंध
- कला और संस्कृति
- कला का प्रयोजन : स्वांतःसुखाय या बहुजनहिताय
- भाषा और संस्कृति
- शृंगार और अध्यात्म
- भारतीय संस्कृति क्या है
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के निबंध
- रूप और नारी
- हमारे साहित्य का ध्येय
- मुसलमान और हिंदू-कवियों में विचार-साम्य
- साहित्य और भाषा
- साहित्य का फूल अपने ही वृंत पर
कन्हैयालाल सहल के निबंध
भारतेंदु हरिश्चंद्र के निबंध
- नाटक
- दिल्ली दरबार दर्पण (THE DELHI ASSEMBLEGE MEMORANDUM)
- स्वर्ग में विचार सभा का अधिवेशन
- भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?
महादेवी वर्मा के निबंध
- युग-बोध, राष्ट्र-निर्माण और महिला-लेखिकाओं का दायित्व
- संस्कृति का प्रश्न
- साहित्यकार व्यक्ति और समष्टि
शांतिप्रिय द्विवेदी के निबंध
श्यामसुंदर दास के निबंध
अज्ञात के निबंध
कुबेरनाथ राय के निबंध
जैनेंद्र कुमार के निबंध
नंददुलारे वाजपेयी के निबंध
प्रतापनारायण मिश्र के निबंध
वासुदेवशरण अग्रवाल के निबंध
अनु बंद्योपाध्याय के निबंध
उपेंद्रनाथ अश्क के निबंध
केशवप्रसाद सिंह के निबंध
गणपति जानकीराम दुबे के निबंध
गणेश शंकर विद्यार्थी के निबंध
गुलाब राय के निबंध
चंद्रधर शर्मा गुलेरी के निबंध
चतुरसेन शास्त्री के निबंध
जगदीश गुप्त के निबंध
जगदीशचंद्र बसु के निबंध
जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी के निबंध
जयप्रकाश नारायण के निबंध
जया मेहता के निबंध
जया विवेक के निबंध
नागार्जुन के निबंध
नामवर सिंह के निबंध
पद्मसिंह शर्मा के निबंध
प्रयाग शुक्ल के निबंध
प्रेमचंद के निबंध
ब्रजनन्दन सहाय के निबंध
भगवतशरण उपाध्याय के निबंध
भदन्त आनन्द कौसल्यायन के निबंध
मनोज दास के निबंध
महात्मा गांधी के निबंध
राजीव गर्ग के निबंध
रामचंद्र तिवारी के निबंध
रामधारी सिंह दिनकर के निबंध
रामवृक्ष बेनीपुरी के निबंध
लल्लू लाल जी के निबंध
विद्यानिवास मिश्र के निबंध
वियोगी हरि के निबंध
विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' के निबंध
शिवपूजन सहाय के निबंध
श्यामाचरण दुबे के निबंध
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के निबंध
हरिशंकर परसाई के निबंध
हेलेन केलर के निबंध
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रसिद्ध हिंदी निबंध कौन-कौन से हैं?
प्रेमचंद के फटे जूते (हरिशंकर परसाई), शिरीष के फूल (हजारीप्रसाद द्विवेदी), हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन), क्या निराश हुआ जाए (हजारीप्रसाद द्विवेदी) और सच्ची वीरता (सरदार पूर्ण सिंह) बहुत लोकप्रिय हिंदी निबंध हैं।
हिंदी निबंधकार कौन हैं?
आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महावीर प्रसाद द्विवेदी, सरदार पूर्ण सिंह, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', महादेवी वर्मा, हरिशंकर परसाई और कुबेरनाथ राय आदि हिंदी के प्रमुख निबंधकार हैं।