सिखों के दूसरे गुरु, श्री गुरु अंगद देव जी (Guru Angad Dev Ji) की बाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज है। उनके सलोक (Salok) आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिकता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग दिखाते हैं। यहाँ गुरु अंगद देव जी के 60+ प्रसिद्ध सलोक हिंदी और रोमन हिंदी (Hinglish) में संकलित किए गए हैं। आप अपनी पसंद के सलोक पर क्लिक करके उसका पूरा अर्थ पढ़ सकते हैं:
गुरु अंगद देव जी के सलोक (हिंदी सूची)
- पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु
- जिसु पिआरे सिउ नेहु तिसु आगै मरि चलीऐ
- जो सिरु सांई ना निवै सो सिरु दीजै डारि
- जे सउ चंदा उगवहि सूरज चड़हि हजार
- इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु
- नालि इआणे दोसती कदे न आवै रासि
- नानक चिंता मति करहु चिंता तिस ही हेइ
- गुरु कुंजी पाहू निवलु मनु कोठा तनु छति
- वैदा वैदु सुवैदु तू पहिलां रोगु पछाणु