संत धरणीदास भक्तिकालीन संत परंपरा के प्रमुख संत कवि हैं, जिनकी वाणियों में निर्गुण भक्ति और ज्ञान का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। उनकी रचनाओं में प्रेम, वैराग्य, ईश्वर-स्मरण और सामाजिक आडंबरों से परे अंतरंग साधना की गहरी सीख दी गई है। इस पृष्ठ पर संत धरणीदास जी के चुनिंदा और प्रसिद्ध भजनों का संपूर्ण संग्रह पाठकों के लिए प्रस्तुत है।
संत धरनीदास जी के प्रसिद्ध भजन (Bhajan Sangrah)
- संतो कहा गृहस्त कहा त्यागी (Santo Kaha Grihast Kaha Tyagi)
- सुमिरो हरि नमहि बौरे (Sumiro Hari Namahi Boure)
- हरिजन बा मद के मतवारे (Harijan Ba Mad Ke Matware)
- जो कोई भक्ति किया चहे भाई (Jo Koi Bhakti Kiya Chahe Bhai)
- पिया मोर बसै गउरगढ़ मैं बसौं प्राग हों (Piya Mor Basai Gaurgarh Main)
- प्रभुजी तोकह लाज हमारी (Prabhuji Tokah Laaj Hamari)
- प्रभुजी अब जनि मोंहि बिसारो (Prabhuji Ab Jani Mohi Visaro)
- बहुत दिनन पिय बसल बिदेसा (Bahut Dinnan Piya Basal Bidesa)
- भई कंत दरस बिनु बावरी (Bhai Kant Darshan Bin Bawari)
- मन तुम कसन करहु रजपूती (Man Tum Kasan Karhu Rajputi)
- मैं निरगुनिया गुन नहिं जाना (Main Nirgunia Gun Nahin Jana)
- राम बिन भाव करम नहिं छूटै (Ram Bin Bhav Karam Nahin Chhootai)
- अजहूँ मिलो मेरे प्रान पियारे (Ajahun Milo Mere Pran Piyare)
- आदि अनादि मेरा सांई (Aadi Anadi Mera Sain)
- आदि अंत मेरा है राम (Aadi Ant Mera Hai Ram)
- कोऊ भयो मुंडिया संन्यासी कोऊ जोगी भयो (Kou Bhayo Mundiya Sannyasi)
सूचना: ऊपर दी गई सूची में से किसी भी भजन पर क्लिक करके आप उसका संपूर्ण पाठ पढ़ सकते हैं। नित्य भक्ति और आध्यात्मिक रचनाओं के लिए इस पृष्ठ को सहेज कर रखें।
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