मैथिली लोकगीत मिथिलांचल की आत्मा हैं। ये गीत सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं और आज भी त्योहारों, पूजा-पाठ, विवाह और सामाजिक आयोजनों में गाए जाते हैं। चाहे नचारी हो, भगवतीक, पराती, कीर्त्तन, छठि, हनुमानक या ब्राह्मणक — हर गीत की अपनी एक अलग मिठास और भावना होती है। इस संग्रह में शिव-नचारी, देवी-भगवतीक, राम-पराती, कृष्ण-कीर्त्तन, छठ मइया के गीत, हनुमान जी के भजन और ब्राह्मणक गीत — सभी प्रमुख मैथिली लोकगीतों की लिरिक्स शामिल हैं।
🕉️ नचारी गीत | Nachari Geet — शिव-पार्वती भक्ति
नचारी गीत शिव-पार्वती के विवाह से जुड़े हुए हैं। ये गीत सावन के महीने और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाए जाते हैं, जिनमें शिवजी की महिमा और बाबा बैद्यनाथ की स्तुति होती है।
- बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया
- शिव हेरब तोर बटिया कतेक दिनमा
- हे हर विपति पड़ल सिर भारी
- शिव हो उतरब पार कओने विधि ना
- अओ शिवशंकर त्रिपुरारी
- बम-बम भैरो हो भूपाल
- भोला नेने चलू हमरो अपन नगरी
- एहन सन धनवानक नगरीमे बाबा
- यो अहाँ बाबा बैदनाथ
- देखहुँ हो शिवशंकर योगी, अति विचित्र विरागी
- भोलेनाथ दिगम्बर दानी किए बिसरायल छी
- हटलो ने मानय त्रिपुरारी हो विपति बड़ भारी
- हे भोला हमर अनमोला, हमर दुखहारी
- तीन नयन सँ सुतला महादेव
- पूजा के हेतु शंकर आयल छी हम पुजारी
- सभहक दुख अहाँ हरै छी भोला, हमरा किए बिसरै छी यो
🌺 भगवतीक गीत | Bhagwatik Geet — देवी भक्ति
भगवतीक गीत दुर्गा और काली माता की आराधना में गाए जाते हैं। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर मिथिलांचल में इन गीतों का विशेष महत्व है।
- महिमा अगम अपार, आनन्दी माँ हे
- दुखियाक दिन बड़ भारी हे काली मइया
- भजै छी तारिणी सब दिन
- अहाँ के सोभे माँ हे सुन्दर मुकुट
- अम्बे अम्बे जय जगदम्बे
- सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे
- मईया के कलशा धरायब गे माई
- माँ के द्वार पर अड़हुल फुल गछिया
- अहाँ जगत-जननी महतारी छी
- काली के मंदिरियामे हम तिरिया
- नया शहर कलकत्ता हो राजा, जहाँ बिराजे महाकाली
- कमल कर गहि कमलवर्णी, कमल कोर बिच शोभिता
- नीम खण्ड बिराजे देवी कालिका
- स्वर्गसँ अयली माता काली, आनन्द लागय
- हे महरानी सिया, काली के महिमा अगम अपार
- तारा नाम तोहार
- खोलू ने केबार
- जगदम्बा हे लीअ ने खबरिया हमार
- कतेक दुख सुनायब हे जननी
- कालिका, एलौं तोरे द्वार, पूजन बेरिया
- इन्द्र गहि-गहि, चक्र गहि-गहि, खर्ग लिअ माता भगवती
🏹 पराती गीत | Parati Geet — राम-सीता विरह
पराती गीत भोर के समय गाए जाने वाले भक्ति गीत हैं, जिनमें राम-सीता के विरह और वियोग की भावनाओं को दर्शाया जाता है।
- जुनि करू राम विरोग हे जननी
- प्रिये हम जाइत छी वनवास
- जाय दीअ यदुवीर, कृष्ण जाय दीअ यदुवीर
- हम ने जीअब बिनु राम हे जननी, हम ने जीअब बिनु राम
- सून भवन भेल भोर
- वचन प्रिय ई गोट मानल जाय
- प्राणसँ प्रिय राम, हमरो प्राणसँ प्रिय राम
- नइया लाबऽ किनारा
- दरसन दीअ भगवान
- कोइलिया नीको ने लागय तोहर बोल
- कओने वन बाजय मुरली
- जाइ छी ताही देश दधि-सुत, जाइ छी ताही देश
- श्यामा श्याम रचल हमर मनमे
- किछु ने रहल मोरा हाथ
- अँटकि जाहु एहिठाम
- राम लेता बास, ओही वन राम लेता बास
🎵 कीर्त्तन गीत | Kirtan Geet — कृष्ण-राम भक्ति
कीर्त्तन गीत राम और कृष्ण की लीलाओं तथा भक्ति भावनाओं को समर्पित हैं। ये सामूहिक भजन-कीर्तन में गाए जाते हैं।
- दशरथ प्राण तेजु
- राज बगियामे देखल दुइ चोर के
- धन धन सीताजी के फुलवरिया
- कहीं भीजत होइहैं भगवान
- देखलहुँ ने सुनलहुँ जमाय हे
- रहि-रहि कऽ जिया ललचाय हो
- श्यामल पहुनमा बिनु निन्दियो ने भावे
- घूमे राम-लखन दुनू भइया
- हे कमलनयन, हे करुणामय
- कैकेयी के अज्ञासँ राम वन गेला
- सोना के खराम चढ़ि
- कृष्ण कृष्ण कऽ द्रोपदी करथि रोदना
🌞 छठि गीत | Chhathi Geet — सूर्य उपासना
छठ पूजा के गीत मैथिली लोकगीतों का सबसे लोकप्रिय हिस्सा हैं। ये गीत छठी मइया की आराधना में गाए जाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
- डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै
- अपने तऽ जाइ छऽ हो भैया
- कांचहि बांस केर गहबर
- हमरो पर होइऔ सहाय
- हमरो के पार लगैया
- बेर-बेर अरजलौं हे दीनानाथ
- केरबा जे फड़ल छै घौदसँ
- हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ
- कोन जल पटेबऽ मालिन
- अंगना में पोखरि खुनायल
🙏 हनुमानक गीत | Hanumanak Geet — बजरंगबली
हनुमानक गीत बजरंगबली की वीरता, भक्ति और शक्ति की महिमा का गुणगान करते हैं। मंगलवार व शनिवार को इन गीतों को विशेष रूप से गाया जाता है।
- बजरंगी हमार गदाधारी
- अंगना के काते-काते नाचे हनुमान
- हमर विनय श्री रामचन्द्र जी सँ कनी कहबनि यो हनुमान
- बजरंगी छी बड़ बलवान, के नई जानैए
- जय हो बजरंगबली वीर बंका
- अंजनी के पुत्र तोहें बाँके हो ललनमा
- हनुमन्त अपनहि सऽ अयला मंदिर घर मे
- कानि कानि कहथिन सीता
- लयलाह लंका उजाड़ि
📿 ब्राह्मणक गीत | Brahmanak Geet
ब्राह्मणक गीत मिथिलांचल की सामाजिक व सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े लोकगीत हैं, जिनमें ब्राह्मण देवता के प्रति श्रद्धा और आशीर्वाद की भावना व्यक्त होती है।
- परबत पहाड़सँ अयलइ एक ब्राह्मण
- झाँखी जे देखलौं ब्राह्मण अजीब किसिम के
- ब्राह्मण पड़लौं अथाहमे, उबारि दिअ यो
- तोहरे भरोसे ब्रहम बाबा
- अन-धन सोनमा अहाँ हमरो के देलहुँ
- कीर्त्तन बजइए अनघोल, यो अहाँ ब्राह्मण बाबू
- छोटी-मोटी ब्राह्मण बाबू के अलप बएस छनि
- घोड़बा चढ़ल अबथिन ब्राह्मण दुलरुआ
- छोटी मोटी ब्राह्मण बाबूके कान दुनू सोनमा
- आउ-आउ-आउ ब्राह्मण अंगना हमार यो
- कथी बिनु आहे ब्राह्मण मुहमा मलीन भेल
- पगिया तोहर गुलबिया हौ ब्राह्मण
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मैथिली लोकगीतों की क्या विशेषता है?
मैथिली लोकगीत मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान हैं। ये गीत शिव-पार्वती, राम-सीता, कृष्ण-राधा, दुर्गा-काली, छठ मइया और हनुमान जी की भक्ति में रचे गए हैं। नचारी, पराती, कीर्त्तन, भगवतीक, छठि आदि अलग-अलग अवसरों पर गाए जाते हैं।
नचारी गीत कब गाए जाते हैं?
नचारी गीत शिव-पार्वती के विवाह से जुड़े हुए हैं। ये गीत सावन के महीने और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाए जाते हैं, जिनमें शिवजी की महिमा और भक्तों की वेदनाएँ व्यक्त होती हैं।
मैथिली में छठ गीत कितने प्रचलित हैं?
छठ पूजा के गीत मैथिली लोकगीतों का सबसे लोकप्रिय हिस्सा हैं। ये गीत छठी मइया की आराधना में गाए जाते हैं और इनमें सूर्य देव और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना होती है।
भगवतीक गीत किस देवी को समर्पित हैं?
भगवतीक गीत मुख्यतः दुर्गा और काली माता को समर्पित हैं। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर इन गीतों को विशेष श्रद्धा से गाया जाता है।
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