आसमाँ तक जो नाला पहुँचा है असरार-उल-हक़ मजाज़
आसमाँ तक जो नाला पहुँचा है
दिल की गहराइयों से निकला है
मेरी नज़रों में हश्र भी क्या है
मैं ने उन का जलाल देखा है
जल्वा-ए-तूर ख़्वाब-ए-मूसा है
किस ने देखा है किस को देखा है
हाए अंजाम इस सफ़ीने का
नाख़ुदा ने जिसे डुबोया है
आह क्या दिल में अब लहू भी नहीं
आज अश्कों का रंग फीका है
जब भी आँखें मिलीं उन आँखों से
दिल ने दिल का मिज़ाज पूछा है
वो जवानी कि थी हरीफ़-ए-तरब
आज बर्बाद-ए-जाम-ओ-सहबा है
कौन उठ कर चला मुक़ाबिल से
जिस तरफ़ देखिए अंधेरा है
फिर मिरी आँख हो गई नमनाक
फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है
सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
असरार-उल-हक़ मजाज़ के बारे में
मजाज़ अपने नाम असरार-उल-हक़ से जाने जाते हैं। उनकी शायरी में रोमांटिक मिज़ाज और तरक़्क़ी-पसंद सोच दोनों मिलते हैं, इसलिए वे इश्क़ और इंक़लाब दोनों की बात एक साथ कर पाते हैं।
यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।
असरार-उल-हक़ मजाज़ की सभी ग़ज़लें
- असरार-उल-हक़ मजाज़
- आसमाँ तक जो नाला पहुँचा है असरार-उल-हक़ मजाज़
- Asrar Ul Haq Majaz Ghazal
- आशिक़ी जाँ-फ़ज़ा भी होती है असरार-उल-हक़ मजाज़
- आओ अब मिल के गुलिस्ताँ को गुल्सिताँ कर दें असरार-उल-हक़ मजाज़
- अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था असरार-उल-हक़ मजाज़
- इज़्न-ए-ख़िराम लेते हुए आसमाँ से हम असरार-उल-हक़ मजाज़
- ऐश से बे-नियाज़ हैं हम लोग असरार-उल-हक़ मजाज़
- कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं असरार-उल-हक़ मजाज़
- करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ असरार-उल-हक़ मजाज़
- ख़ामुशी का तो नाम होता है असरार-उल-हक़ मजाज़
- ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई असरार-उल-हक़ मजाज़
- जिगर और दिल को बचाना भी है असरार-उल-हक़ मजाज़
- धुआँ सा इक सम्त उठ रहा है शरारे उड़ उड़ के आ रहे हैं असरार-उल-हक़ मजाज़
- नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता असरार-उल-हक़ मजाज़
- बर्बाद-ए-तमन्ना पे इताब और ज़ियादा असरार-उल-हक़ मजाज़
- यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर असरार-उल-हक़ मजाज़
- ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती असरार-उल-हक़ मजाज़
- रह-ए-शौक़ से अब हटा चाहता हूँ असरार-उल-हक़ मजाज़
- वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं असरार-उल-हक़ मजाज़
- साज़गार है हमदम इन दिनों जहाँ अपना असरार-उल-हक़ मजाज़
- सीने में उन के जल्वे छुपाए हुए तो हैं असरार-उल-हक़ मजाज़
- हुस्न फिर फ़ित्नागर है क्या कहिए असरार-उल-हक़ मजाज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
असरार-उल-हक़ मजाज़ की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?
सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।
असरार-उल-हक़ मजाज़ की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?
सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।
ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?
शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।