वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए अख़्तर शीरानी
वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए
रात दिन सूरत को देखा कीजिए
चाँदनी रातों में इक इक फूल को
बे-ख़ुदी कहती है सज्दा कीजिए
जो तमन्ना बर न आए उम्र भर
उम्र भर उस की तमन्ना कीजिए
इश्क़ की रंगीनियों में डूब कर
चाँदनी रातों में रोया कीजिए
पूछ बैठे हैं हमारा हाल वो
बे-ख़ुदी तू ही बता क्या कीजिए
हम ही उस के इश्क़ के क़ाबिल न थे
क्यूँ किसी ज़ालिम का शिकवा कीजिए
आप ही ने दर्द-ए-दिल बख़्शा हमें
आप ही इस का मुदावा कीजिए
कहते हैं 'अख़्तर' वो सुन कर मेरे शेर
इस तरह हम को न रुस्वा कीजिए
अख़्तर शीरानी के बारे में
अख़्तर शिरानी रोमांटिक शायरी के सबसे बड़े नामों में गिने जाते हैं। उनकी ग़ज़ल में हुस्न, इंतिज़ार और बे-ख़ुदी की एक अलग ही आवाज़ है।
यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।
अख़्तर शीरानी की सभी ग़ज़लें
- अख़्तर शीरानी
- वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए अख़्तर शीरानी
- Akhtar Shirani Ghazal
- वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें अख़्तर शीरानी
- यूँ तो किस फूल से रंगत न गई बू न गई अख़्तर शीरानी
- मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूँ अख़्तर शीरानी
- मिरी आँखों से ज़ाहिर ख़ूँ-फ़िशानी अब भी होती है अख़्तर शीरानी
- तमन्नाओं को ज़िंदा आरज़ूओं को जवाँ कर लूँ अख़्तर शीरानी
- झूम कर बदली उठी और छा गई अख़्तर शीरानी
- कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता अख़्तर शीरानी
- किस को देखा है ये हुआ क्या है अख़्तर शीरानी
- किस की आँखों का लिए दिल पे असर जाते हैं अख़्तर शीरानी
- काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें अख़्तर शीरानी
- ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए अख़्तर शीरानी
- आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या अख़्तर शीरानी
- उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं अख़्तर शीरानी
अख़्तर शिरानी की ग़ज़ल में इंतिज़ार का सुर बहुत साफ़ है। हुस्न की तारीफ़ करते हुए भी वे यह नहीं भूलते कि मोहब्बत में दूरी भी है। इसीलिए उनके शेर सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं, बल्कि सच्चे भी लगते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अख़्तर शीरानी की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?
सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।
अख़्तर शीरानी की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?
सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।
ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?
शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।
अख़्तर शिरानी की शायरी किस बात के लिए जानी जाती है?
रोमांटिक शायरी के लिए। उनकी ग़ज़ल में हुस्न, इंतिज़ार और बे-ख़ुदी का मिला-जुला रंग दिखता है।