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ऐतबार साजिद की ग़ज़लें: Aitbar Sajid Ghazal in Hindi

2026-11-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो

तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो
मुझे अपने रूप की धूप दो कि चमक सकें मिरे ख़ाल-ओ-ख़द
मुझे अपने रंग में रंग दो मिरे सारे रंग उतार दो
किसी और को मिरे हाल से न ग़रज़ है कोई न वास्ता
मैं बिखर गया हूँ समेट लो मैं बिगड़ गया हूँ सँवार दो

ऐतबार साजिद के बारे में

ऐतबार साजिद की ग़ज़ल में मोहब्बत के साथ उसका हिसाब भी है। वे जज़्बे में बहते नहीं, ठहर कर सोचते हैं, और यही उनकी अलग पहचान है।

यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।

ऐतबार साजिद की सभी ग़ज़लें

ऐतबार साजिद की ग़ज़ल पढ़ते हुए लगता है कि शायर अपने ही दिल से हिसाब माँग रहा है। वे जज़्बात में बहते नहीं, उन्हें तौलते हैं। यही ठहराव उनके शेरों को दूसरे शायरों से अलग करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऐतबार साजिद की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?

सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।

ऐतबार साजिद की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?

सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।

ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?

शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।

ऐतबार साजिद की ग़ज़ल का मिज़ाज कैसा है?

सोचने वाला। वे मोहब्बत की बात करते हैं पर उसका हिसाब भी रखते हैं, इसलिए उनके शेर सिर्फ़ जज़्बाती नहीं, समझदार भी लगते हैं।

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