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अहमद नदीम क़ासमी की ग़ज़लें: Ahmad Nadeem Qasmi Ghazal in Hindi

2026-11-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा
तेरा दर छोड़ के मैं और किधर जाऊँगा
घर में घिर जाऊँगा सहरा में बिखर जाऊँगा
तेरे पहलू से जो उठ्ठूँगा तो मुश्किल ये है
सिर्फ़ इक शख़्स को पाऊँगा जिधर जाऊँगा
अब तिरे शहर में आऊँगा मुसाफ़िर की तरह
साया-ए-अब्र की मानिंद गुज़र जाऊँगा
तेरा पैमान-ए-वफ़ा राह की दीवार बना
वर्ना सोचा था कि जब चाहूँगा मर जाऊँगा
चारासाज़ों से अलग है मिरा मेआ'र कि मैं
ज़ख़्म खाऊँगा तो कुछ और सँवर जाऊँगा
अब तो ख़ुर्शीद को गुज़रे हुए सदियाँ गुज़रीं
अब उसे ढूँडने मैं ता-ब-सहर जाऊँगा
ज़िंदगी शम्अ' की मानिंद जलाता हूँ 'नदीम'
बुझ तो जाऊँगा मगर सुब्ह तो कर जाऊँगा

अहमद नदीम क़ासमी के बारे में

अहमद नदीम क़ासमी शायर के साथ कहानीकार भी थे। इसीलिए उनकी ग़ज़ल में किस्सा कहने की तरह एक बहाव है, और आम आदमी की ज़िंदगी उसमें साफ़ दिखती है।

यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अहमद नदीम क़ासमी की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?

सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।

अहमद नदीम क़ासमी की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?

सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।

ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?

शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।

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