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अहमद मुश्ताक़ की ग़ज़लें: Ahmad Mushtaq Ghazal in Hindi

2026-11-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है
वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है
जिस की साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे
ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है
इक ज़माना था कि सब एक जगह रहते थे
और अब कोई कहीं कोई कहीं रहता है
रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
दिल फ़सुर्दा तो हुआ देख के उस को लेकिन
उम्र भर कौन जवाँ कौन हसीं रहता है

अहमद मुश्ताक़ के बारे में

अहमद मुश्ताक़ की ग़ज़ल में भाषा की सफ़ाई और ख़याल की गहराई दोनों मिलते हैं। उनके शेर पढ़ते हुए लगता है कि बात बहुत सोच-समझ कर कही गई है।

यहाँ उनकी ग़ज़लें आसान देवनागरी में पढ़ी जा सकती हैं, ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले पाठक भी उनकी शायरी तक पहुँच सकें। हर ग़ज़ल का लिंक नीचे दिया गया है, आप सीधे उसी ग़ज़ल पर पहुँच जाएँगे।

अहमद मुश्ताक़ की सभी ग़ज़लें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अहमद मुश्ताक़ की ग़ज़लें किस भाषा में हैं?

सारी ग़ज़लें देवनागरी में हैं, इसलिए उर्दू लिपि जानने की ज़रूरत नहीं। कुछ ग़ज़लें रोमन में भी मिलती हैं।

अहमद मुश्ताक़ की ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?

सभी ग़ज़लें ghazalhighazal पर हैं। और शायरों का पूरा संग्रह ग़ज़ल शायरी संग्रह में एक जगह मिलेगा।

ग़ज़ल और शायरी में क्या फ़र्क़ है?

शायरी बड़ा शब्द है जिसमें ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई सब आते हैं। ग़ज़ल में हर शेर अपने आप में पूरा होता है, और सब शेर एक ही बहर में होते हैं।

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